मंगलवार, 10 मई 2016

कागजों में ही चल रहा है साक्षर भारत मिशन

कागजों में ही चल रहा है साक्षर भारत मिशन
साक्षर भारत मिशन अभियान में बडे पैमाने पर गडबडियां -------- 24 नवम्बर।-बुनियादी शिक्षा से महरुम वयस्कों में साक्षरता की अलख जगाने वाला साक्षर भारत मिशन अभियान अब केवल कागजों में ही सिमट कर यह गया है।अन्य विभागों की तरह इस मिशन पर भी भ्रष्टाचार की काली छाया पड गई है। मिशन के तहत अब तक प्रेरको दवारा 6 बार बुनियादी साक्षरता परीक्षा का आयोजन करवाया जा चुका है,लेकिन लर्नर किट(अध्ययन सामग्री) केवल एक बार ही उपलब्ध करवाई गई।ऐसे में बिना अध्ययन सामग्री साक्षरता केसे बढेगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। राज्य मे योजना शुरू हुए 3 साल बीतने के बाद भी अब तक गांवों मे स्थापित लोक शिक्षा केंद्रों मे संसाधन नहीं पहुंचे है।न तो किताबें, मैप ,चार्ट सहित अन्य पाठ्य सामग्री दी गई और न ही प्रेरको को साईकिल मिला है।केन्द्र सरकार के प्रावधानों के तहत शिक्षा केंद्रों में किताबें ,मैगजीन व अन्य पाठ्य सामग्री के लिए 5 हजार रूपये ,प्रोग्राम सपोर्ट के लिए 12500 रुपये ,केरोसिन व लाइटिंग सामग्री के लिए2500 रुपये, बिजली-पानी ,मेंटनेंस व अन्य खर्च के लिए 4500रूपये तथा आफिस खर्च के लिए 2500 रूपये प्रतिवर्ष निर्धारित किए गए।लेकिन लोक शिक्षा केंद्रों को अब तक इनमें से फूटी कौडी भी हासिल नहीं हुई है।ऐसे मे सवाल यह उठता है कि सरकार दवारा निरक्षरता खत्म करने के लिए चलाया गया यह अभियान कैसे पूरा होगा। प्रदेश मे अगस्त 2012मे दस जिलों के 62 ब्लाकों के प्रत्येक गावों में लोक शिक्षा केंद्र स्थापित कर दो प्रेरकों की नियुक्ति की गई।प्रावधानों मे यह तय किया गया कि शिक्षा केंद्रों के बेहतर संचालन के लिए वहां सभी जरुरी संसाधन मुहैया कराए जाएगें।प्रत्येक प्रेरक का मानदेय 2000 रूपये प्रति माह सहित प्रत्येक शिक्षा केंद्र पर 75000 वार्षिक खर्च निर्धारित किया गया।अन्य खर्च तो दूर कि बात है प्रतिदिन केंद्र पर 6 घंटे कार्य करने वाले प्रेरकों को पिछले 7 माह से मानदेय नहीं मिल पाया है।ऐसे मे मिशन की सार्थकता का अंदेशा स्वयं लगाया जा सकता है।इस संबंध मे प्रेरक संघ हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष भगवत कौशिक का कहना है कि जब प्रेरको दवारा बिना अध्ययन सामग्री परीक्षा करवाने से मना किया जाता है तो अधिकारियों दवारा उन्हे हटा कर दूसरों को लगा देने की धमकी दी जाती है।राज्य साक्षरता प्राधिकरण मिशन आथारिटि के अधिकारी प्रेरको पर दबाव डालकर केवल लोगो को कागजों मे ही साक्षर बनाने का काम कर रहे है।इस संबंध में पीएम व सीएम को भी अवगत करवाया जा चुका है लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है।इसी नकारात्मक रवैये के कारण प्रेरको को 8 माह से मानदेय का एक भी पैसा नहीं मिल पाया है। हरियाणा सरकार प्रेरको का आर्थिक एवं मानसिक शोषण कर रही है ।भगवत कौशिक के अनुसार संसाधनों के नाम पर शिक्षा केंद्रो को एक मेज, दो कुर्सी, एक दरी,दो अलमारी उपलब्ध करवाई गई है जो निम्न गुणवत्ता की है।

BHAGWAT Kaushik
M.no.9812191860

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