रविवार, 22 जून 2025
सैमन कैंप
बुधवार, 18 जून 2025
साक्षरता आंदोलन नारे
शुक्रवार, 25 अप्रैल 2025
अंधविश्वास
सोमवार, 16 दिसंबर 2024
शनिवार, 30 नवंबर 2024
अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह
अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह करने में मुसलमान सबसे आगे थे
इसमें कोई संदेह नहीं कि मुसलमानों ने राष्ट्रीय आंदोलन में जबरदस्त भूमिका निभाई। वे देशभक्त और समर्पित लोग थे और इसलिए उन्होंने भारत का शोषण करने वाली विदेशी ताकतों को बाहर खदेड़ने के लिए कठिन संघर्ष किया। राष्ट्रीय आंदोलन के वस्तुगत अध्ययन से यह पता चलता है कि राष्ट्रवादी जन उभार में मुसलमान कभी पीछे नहीं रहे। भारत की आजादी के लिए वह दूसरे समुदाय के लोगों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़े। गृह मंत्रालय की फाइलें उनके बलिदानों से भरी पड़ी हैं, जिनके चलते 1947 में अंग्रेजों को भारत छोड़ना पड़ा।
हैदर अली और उनके बेटे टीपू सुल्तान ढक्कन (दक्षिण भारत) में अंग्रेजों के बढ़ते कदमों को रोकने के लिए 18 वीं सदी में उठ खड़े हुए। बंगाल के फकीरों की बगावत तथा फराइजी और
वहाबी आंदोलन ने भारत में अंग्रेजी राज के विस्तार की शुरुआती योजना की रफ्तार को अस्त - व्यस्त कर दिया था। खिलाफत आंदोलन ने भारत में अंग्रेजी राज के खिलाफ भारी तादाद में मुसलमान को लड़ाकू बनाने में प्रगतिशील भूमिका निभाई । राष्ट्रवाद को बढ़ाने में इस आंदोलन ने सकारात्मक भूमिका निभाई। अंग्रेजों के खिलाफ घृणा और क्रोध की चिंगारी 1857 में एक बार फिर फूट पड़ी। इस बार यह महज किसी एक समूह की बगावत नहीं थी बल्कि पूरे देश में अंग्रेजों के खिलाफ एक जन विद्रोह था जिसे प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के नाम से जाना जाता है।
उल्लेखनीय है कि 1857 तक आजादी का कारवां लगभग पूरी तरह मुसलमानों के नेतृत्व में चला। चूंकि सत्ता मुसलमानों से छीनी गई थी, इसलिए
स्वाभाविक रूप से विजातीय सरकार के पहले नंबर के दुश्मन थे। सुभाष चंद्र बोस को की सेना - आईएनए में बहुत सारे मुसलमान भर्ती हुए ।
जब गांधी जी स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान जनता से समर्थन हासिल करने के लिए भारत का दौरा कर रहे थे, तब कई मुसलमानों ने काफी पैसे और गहने चंदे में दिए। यह सच है कि भारी संख्या में मुसलमान समय- समय पर राष्ट्रीय आंदोलन से जुड़े और उन्होंने यादगार भूमिका निभाई। अलीगढ़ और रोहेलखंड में आमतौर पर मुसलमान जन उभार में शामिल थे। जालियांवाला बाग नरसंहार में अनेक मुसलमानों ने अपनी जान न्योछावर की। डॉक्टर सैफुद्दीन, किंचलू और डॉक्टर सत्यपाल उसे सभा के नेता थे और डॉक्टर बशीर मुख्य अतिथि थे।
इसी तरह उर्दू भाषा में स्वाधीनता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई उर्दू के शेयरों साहित्यिक विद्वानों पत्रकारों वक्ताओं और देश ने स्वाधीनता आंदोलन के उद्देश्य का प्रचार प्रसार किया और अनब्लॉक जैसे प्रकाशन स्वतंत्रता आंदोलन के अंक थे मां ने बंगाल के हर जिले का दौरा किया तथा हिंदू मुस्लिम एकता और स्वाधीनता आंदोलन के महत्व पर तकरीर की। मजलिस अशरफुल इस्लाम खुदाई खिदमतगार सिया पॉलिटिकल कॉन्फ्रेंस और ऐसे दूसरे मुस्लिम संगठनों ने राष्ट्रीय आंदोलन को अपना समर्थन दिया।
शुक्रवार, 29 नवंबर 2024
अब हालात बदलने होंगे
अब हालत बदलने होंगे ग़म का बोझ उठाने वाले |
वरना देते ही जायेंगे दुःख दिन रात ज़माने वाले |
मजलूमों को बाँट रहे हैं परम्पराओं के बहाने करके
इस साजिस ही में शामिल हैं वे नफरत फ़ैलाने वाले |
दुनिया पर कब्ज़ा है जिन का वो उस के हक़दार नहीं हैं
उनसे अब कब्ज़ा छीनेंगे सब का बोझ उठाने वाले |
पत्थर दिल लोगों से अपने जख्मों को ढांपे ही रखो
खुद को हल्का कर लेते हैं सबको जख्म दिखाने वाले |
कोई किसी का साथ निभाए इतनी फुर्सत ही किसको है
अफसानों में मिल सकते हैं अब तो साथ निभाने वाले
रविवार, 24 नवंबर 2024
कविताएं
विश्व बैंक
विश्व बैंक हमारा रक्षक हमने रक्षक माना इसको।
निकला यह पूरा ही भक्षक अनुभव से जाना इसको।
गरीबी और बेकारी सबके खत्म होने की आस उठी
मगर पन्दरा साल के भीतर जवान बेटे की लाश उठी
विश्वबैंक के कान हों तो गरीब की व्यथा सुनाना इसको।
शिक्षा जगत में गुणवत्ता का इसने ही प्रचार किया
जैसी शिक्षा थी अपनी उस पर जमकर प्रहार किया
महंगी शिक्षा गुणवत्ता नहीं इतना तो बताना इसको।
स्वस्थ जगत का रंग बदला बड़े अस्पताल ले आए
मेरे जैसे गरीब गुरबा तो इनके अंदर नहीं घुस पाए
अपोलो फोर्टिस की कल्चर ये जरा समझाना इसको।
बहुराष्ट्रीय कंपनियों का यह रक्षक असल में पाया
मुखौटा हमारी मदद का रंग रंगीला इसने लगाया
रणबीर का पैन खोसने का ना मिला बहाना इसको।
****** होंगे बेशक मीलों के फ़ाँसले पर प्यार न कम होगा ।।
लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप को निभाने का दम होगा ।।
जरूरी पक्ष है इसका आपस में बातचीत करते रहना
इसका मतलब यह भी नहीं 24 घंटे इसमें खपते रहना
समय-समय पर बात करना ही लगता सही कदम होगा ।।
बात करते समय भविष्य या रिश्तो की बात नहीं जरूरी
सकारात्मक मुद्दों पर बातचीत काम करती है ये हमारी ग़रूरी
विवाद की बातचीत करने का फिर कभी नहीं हमारा मन होगा।।
उनकी सुने अपनी सुनाऐं साथी की अनदेखी ठीक नहीं होती
अनदेखी खटास लाती रिश्तो में आपस का विश्वास भी खोती
इसलिए हमको जीवनसाथी की बात पर ज्यादा से ज्यादा नमन होगा।।
रिश्तो की पास के या दूर के इनकी नींव आपस का भरोसा बताया
मिलने का प्रयास रहना चाहिए जब भी मिलने का मौका पाया
प्यार और सम्मान हो रिश्ते में इसी से दमदार हमारा चमन होगा।।
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दोहरापन
दोहरापन जीवन का हमको अंदर से खा रहा ।
एक दिखे दयालू दूसरा राक्षस बनता जा रहा ।
चेहरों का खेल चारों तरफ दुनिया में फैल रहा ,
मुखोटे हैं कई तरह के कोई पहचान नहीं पा रहा।
सफेद मुखौटा काला चेहरा काम इनके काले हैं
बिना मुखोटे का तेरा चेहरा न किसी को भा रहा।
कौन सा मुखौटा गुजरात में करतब दिखा रहा ये
जनता को बहला धर्म पर कुर्सी को हथिया रहा ।
धार्मिक कट्टरता का चेहरा प्यारा लगता क्यों है
मानव से मानव की हत्या रोजाना ही करवा रहा।
कौन धर्म कहता हमको घृणा का मुखौटा पहनो
खुद किस झोपड़ी में आग खुदा जाकर लगा रहा।
राम भी कहता प्यार करो दोहरेपन को छोड़ दो अब
रणबीर भी बात वही दूजे ढंग से है समझा रहा।।।
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दोस्त
पास रहकर भी दूर रहना कोई सीखे तुमसे
बिना कहे बहुत कुछ कहना कोई सीखे तुमसे
लालच व भोग का बाजार जकड़े हुए हैं हमें
बाजारी दुनिया से फ़हना कोई सीखे तुमसे ।
हर ईंट के नीचे आज बैठा बिच्छू दिखाई देता है
बिच्छुओं के दंश न सहना कोई सीखे तुमसे ।
माया जाल फैला है यहां झूठ और मक्कारी का
इस जाल की आग़ में न दहना कोई सीखे तुमसे ।
सोने पर ये रांग का पानी चढ़ा कर बेचते देखो
कैसे पहचानें असली गहना कोई सीखे तुमसे ।
वैश्वीकरण के तूफान में सब कुछ बह चला है
इस तेज तूफान में न बहना कोई सीखे तुमसे।
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जुबां खुली भी है तो उनके
गुणगान करने को
इजाजत कहां है उनकी
समीक्षा करने की।
आजादी है औरत को अपना
शरीर बाजार में बेचने की
मगर आजादी नहीं अपनी
मर्जी से शादी करने की ।
बिकने की आजादी पूरी
ना बिकने पर रास्ते से
हटाने की उनकी मजबूरी
पता नहीं शहीद कितनी
बोली नहीं लगने दी जिन्होंने
आज के खूबसूरत से इस
बाजार में।
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सुबह तैयार हो अस्पताल को चला
हरेक इंसान भागता हुआ सा मिला
परेशन सी ये सूरत भागती सी टाँगें
किसी का भी चेहरा दिखा न खिला
सड़कों पर ये कारें सरपट दौड़ रही
स्कूटर आगे निकालें लग हौड रही
पैदल लड़के आदमी औरत ये बच्चे
सबको वे लड़कियां पीछे छोड़ रही
लंगड़ाते मरीज संबंधी का है सहारा
धक्के खाता इधर उधर को बेचारा
कभी यहाँ लाइन कभी वहां लाइन
उसे नहीं मिलता कोई छोर किनारा
क्या इलाज इस भीड़ की बीमारी का
धक्के मुक्के खेल देखो लाचारी का
गरीब दुखी ये कर्मचारी दुखी भीड़ से
पहोंच रिश्वत का तमाशा महामारी का
सुबह शुरू किया साँस नहीं आया भाई
मरीजों की कतार ने खूब थकाया भाई
हाली भी हलाई के बाद रेस्ट कर लेता
डेढ़ बजे तक दबाव मेरे पे बनाया भाई
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गुर्दे का गुर्दा
किडनी लगवाने वाले विदेशी मूल के
किडनी देने वाले सभी देसी फूल थे
बीच में एजेंट हैं साथ में डॉक्टर उसूल के
जिसके गुर्दे फेल हो गए मरने को है
दूसरा जीवन देना हम सबका फर्ज है
गरीबी के चलते किडनियां फेल न हों
उनको भी बचाना मानवता के खाते दर्ज है
जिसे गुर्दा चाहिए था उसे गुर्दा दिलवाया
भूख के कारण दोनों गुर्दे मरने को थे
उनमें से एक गुर्दा तो बचा ही दिया
दानी गुर्दे से एक और मानव बच पाया
काफी लोगों को रोजगार मुहैया करवाया
एजेंटों का जाल बिछा कर चुपचाप पुण्य किया
गुर्दा लेने और देने का कानून सख्त इतना
इससे बचने का प्रयास करना पड़ता कितना
जरा सोचो तो सही दिमाग पर जोर देकर
विदेशी को अपने ही देश में अपने लिए
महज एक गुर्दा भी क्यों नहीं मिला
भारत देश महान का गुर्दा उसे क्यों भाया
पैसे का खेल है यहां पर मेरे यारों
इसी कारण बदेशी देशी गुर्दा खरीद पाया
इसके लिए नेता अफसर पुलिस के
बिक गए बस कीमत की बात थी यारो।
*****
रसातल
बस कुछ मत पूछो
रसातल में जा रहा है समाज
पहले वाली कोई बात ही नहीं
लड़के तो बिगड़ैल पहले से ही थे
अब इन लड़कियां को आज डराया
धमकाया बहकाया जा रहा है
नकल करने को मजबूर
आजकल एकल परिवार और एकल हो गया
मां कहीं बाप कहीं खुद कहीं तो पत्नी कहीं
इसे क्या कहें घर परिवार या महज एक व्यक्ति
खाने में मिलावट, पानी साफ नहीं ,
हवा का प्रदूषण कोई भी माफ नहीं
ग्लोबल फूड क्राइसिस वाटर क्राइसिस
ग्लोबल वार्मिंग का बढ़ता यह खटका
सिस्टम लगता है पूरा का पूरा भटका
भर गया भर गया पाप का मटका
यह तो सभी चाहते हैं कि समाज में
सुधार की बहुत जरूरत है आज
कई भगत सिंह पैदा हों फिर से
मगर हों पड़ोसियों के यहां
हमारे बच्चों को तो ट्यूशन से
फुर्सत ही कहां है?
2/5/08
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पृथ्वी दुखड़ा अपना सबको आज सुनाती है
चारों तरफ से हमला अस्तित्व बचाना चाहती है
हरियाणा की धरती से गिद्ध खत्म होते जा रहे
मोर भी जगह-जगह पर ये मरे हुए पा रहे
कैंसर क्यों बढ़ते जा रहे हमें समझ ना आती है ।
जमीन हमारे खेतों की बोझ होती जा रही आज
फसल सब कुछ करके भी ना बढ़ पा रही आज
बीमारी क्यों छा रही आज जमीन बिक जाती है।
बाजारू विकास के तले टिकाऊ विकास खो गया
कैसा दोहन कुदरत का चारों तरफ को हो गया
बीज बिघन के बो गया धरती की हद छाती है।
****
सुरक्षित कौन
रोहतक में करोड़ों रुपए का व्यापार रोजाना होता
5 महीने में इस शहर में व्यापारियों की
दो हत्याएं हो चुकी हैं
चार व्यापारियों को लूटा जा चुका है
एक पर जान लेवा हमला
किया गया दिन दहाड़े
यदि व्यापारी ही असुरक्षित हैं
तो सीएम सिटी में
फिर सुरक्षित कौन है ?
2008
*****
विदेशी फल
विदेशी फलों का स्वाद
चखें अपने देसी शहर में ही
दिल्ली मुंबई और कलकत्ता
भागकर जाने की जरूरत नहीं
हमारे शहर का बाजार भी
विदेशी फलों से सजा हुआ है
शहर की रेहड़ियों पर तरतीब से
टिके हुए हैं विदेशी फल
चाहे देसी से विदेशी की कीमत
ज्यादा क्यों न हो
कीमत की किसे चिंता है
फल विदेशी हमारे घर में है
यह बात दीगर है कि हमारे
पिताजी देसी की लड़ाई
लड़ते-लड़ते दम तोड़ गए
थाईलैंड का अमरूद
मिलता है ₹200 किलो
कैलिफोर्निया का हरा सेब
क्या कहने हैं सब के
चाइनीज सेब भी आ टपक
थोड़ा सस्ता है कैलिफोर्निया से
ऑस्ट्रेलिया का बब्बू गोसा
अमीर को क्या परवाह महंगे की
मध्यम वर्ग भी देखा देखी
भरने लगा अपने फ्रिजों को
विदेशी फलों से
स्वाद तो बेहतर है
देसी में वह स्वाद कहां
जो विदेशी में है।
****
हमारी बला से
हमने तरक्की की है
किस कीमत पर हमारी बला से
ऊंची ऊंची इमारतें पाश इलाकों में
जहां 5-10 करोड लोग रहते हैं
फिर चाहे गरीबी बढ़ती है तो बढ़े, 90 करोड के मकान बरसात में टपकते रहें
कारपोरेट सेक्टर फल फूल रहा है
फिर चाहे बेरोजगारी बढ़ती है तो बढ़े
हमारी उद्योग आसमान की ऊंचाइयों छू रहे हैं
फिर चाहे बहुत से लोग भूख से मरते हैं तो मरें
हमारा अपना बिजनेस है कई माल हैं हमारे
फिर चाहे छोटी-छोटी किरयाना की दुकान है बंद होती है तो हमारी बला से
हमारे पास फोन एक्सचेंज है
कर्ज में किसान फांसी खाते हैं तो हम क्या कर सकते हैं
बहुत आधुनिक हैं हम
फिर चाहे प्लेग फैलता है तो फैले
एटम बम है हमारे पास
फिर भी चाहे सामाजिक सुरक्षा बढ़ती है तो बढे
पांच सितारा अस्पताल है महान भारत देश में
फिर चाहे लोग बिना इलाज के मरते हैं तो मरें
अच्छी खासी फौज है हमारे पास
फौजी शहीद होते हैं तो होते रहें
आर्थिक स्तर में गोआ गोवा के बाद है हरियाणा
फिर लिंग अनुपात में सबसे नीचे है तो क्या
कुछ हथियार और पैसा और हो
फिर चाहे दलितों के घर जलाए जाते हैं तो क्या
गौ रक्षा हमारा धर्म है
मनुष्य मरते हैं तो मरते रहें
हम 2020 तक दुनिया की महाशक्ति बन सकते हैं
विकास की कीमत तो अदा करनी ही पड़ेगी
आईडियोलॉजी का जमाना गया क्वालिटी का जीवन का जमाना आ गया
हमने तरक्की की है
किस कीमत पर हमारी बला से
*******
क्वालिटी
क्वालिटी का जमाना है
कीमत का क्या मायना है
फल विक्रेता की भी
खूब चांदी हो रही है
ग्राहक ज्यादा मूल भाव भी
नहीं करते मगर
देसी आम और तरबूज
साथ में है खरबूजा
इनका संगी ना बदेशी दूजा
लीची भी है देसी अपनी
सस्ते बढ़िया देसी फलों का
अपने ही बाजार में यूं पिटना सोचो तो सही क्या यह
सही बात है?
******
किसान ने अपनी मेहनत से
जो गेहूं अपने खेत में
उगाया
उसका भाव भी उसे
उसकी मेहनत के मुताबिक
ना मिल पाया
मंडी में आढ़ती ने भी
अपना पूरा करतब
दिखलाया
मंडी में वही की हूं जब
खुले में रखा गया और
बरसात में भीग़ गया
यह देख किसान का जी
बहुत दुख पाया
पूरे 6 महीने की मेहनत
जब यूं खुले में बर्बाद हो
तो गम तो होगा ही
यह बात अलग है कि
हम उस मेहनत की
कीमत से वाकिफ ही
नहीं है?
*****
प्यार का तोफा
एक लड़की ने एक लड़के से प्यार किया
लड़के ने उसे बलात्कार का उपहार दिया
इतने मेंभी सबर नहीं उस वहसी को आया
अपने चार मुसटन्ड़ों को था साथ में लाया
उन्होंने भी बारी बारी मुंह किया था काला
गिरती पड़ती ताऊ के घर पहुँची थी बाला
ताऊ को बाला ने सारी हकीकत बताई थी
ताऊ ने भी वह हवस का शिकार बनाई थी
माँ बाप ने जाकर बाला को छुड वाया था
पुलिस में हिम्मत कर केस दर्ज कराया था
गाँव के कुछ नौजवानों ने आवाज उठाई थी
पाँचों की और साथ ताऊ की जेल कराई थी
आज भी जेल में पैर पीट रहे हैं सारे के सारे
क्या हुआ समाज को हवस ने हैं पैर पसारे
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विश्व बैंक
विश्व बैंक हितैषी बनकर आया रक्षक भक्षक कैसे बन जाता इसने हमें समझाया
गरीबी और बेकरी
खत्म होने की आस उठी
15 साल के भीतर
जवान बेटे की लाश उठी
विदेशी कंपनी आ गई
हमने पूरे दरवाजे खोल दिए
विदेशियों के साथ मिल गए
देसी भी
घी के दीए जल रहे उनके
हमारे घर ग्रुप अंधेरा है
गुरबत की जंजीर जकड़ रही है
हमें
यहां सब कुछ शाइनिंग है।
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कीमत बढ़ेगी
महिलाओं की संख्या कम होगी तो
महिलाओं की कीमत बढ़ जाएगी
यही मानते और सुनते आए थे
मगर यह क्या है?
मुर्रा भैंस की कीमत एक लाख
बिहारी बहु मिले पांच हजार में
हर रोज भारत में क्या होता है
मालूम है आपको ?
रोजाना
चौबीस की चढ़ती है बलि दहेज की
छियासी की लुटे है हर रोज आबरु
चार सौ अस्सी से हो छेड़छाड़
पैंतालीस फीसद के पति करें पिटाई
पचास प्रतिशत गर्भवती महिलाएं
जिनपर हिंसा करके मर्द बनते हम
हिंसा की शिकार सत्तर प्रतिशत
आत्महत्या का प्रयास करती हैं
मेरा देश महान है
विश्व गुरु बनाने का आह्वान है।
****
क्या है यह विकास या विनाश
फिर भी हमें तो यही है आस
जिनका सम्मान छीन लिया गया
जिनकी अस्मिता तार-तार कर दी
वो एक दिन इकट्ठे होकर
पूरा हिसाब मांगेंगे और हिसाब करके
हिसाब सर एक नई दुनिया बनाएंगे।