सोमवार, 6 फ़रवरी 2023

निर्मला

 निर्मला

बयान अपनी जुबान से
मैं एक साधारण परिवार में पली लड़की
अपने जीवन को सार्थक बनाने चली लड़की अनगिनत सहन की है जीवन की ये कठिनाई गांव के ही मेरे जात भाइयों ने इज्जत लूटी चाही खेतों में काम करते दलित भाई दौड़े-दौड़े आए तभी मेरे ऊपर से जुल्म के बादल छट पाये
कालेज जाने लगी तो इन्होंने मेरा पीछा ना छोड़ा दूसरे गांव के लड़कों से सूत्र इन्होंने था जोड़ा
घर पर बात बताई तो कहते बंद करो पढ़ाई कॉलेज में वूमेन सेल बात वहां भी न बन पाई आशा और निराशा बीच मैंने एमए पास किया अच्छे नंबर आए मेरे थोड़ा सुख का सांस लिया नेट भी पास कर लिया पर नौकरी नहीं मिलती मां कहती है मेरे चेहरे पर क्यों हंसी नहीं खिलती कैसे खिले हंसी देशभक्तो मुझे बताओ तो  सही
क्या करूं आगे का राह मुझे दिखाओ तो सही
प्राइवेट स्तर पर मैंने बी एड भी कर ही लिया है
ये रिश्ते ढूंढते ढूंढते घरवालों का जी भर लिया है ना कहीं नौकरी मिल रही ना शादी हो रही मेरी क्या नहीं दिखती तुम्हें ये जो बर्बादी हो रही मेरी कई जगह बात तो चली दहेज को लेकर टूट गई
मर जाने को दिल करता है आस सभी छूट गई क्या करूं कहां जाऊं मेरी कुछ समझ न आ रहा
बूढ़े मात पिता हैं मेरे उनका दुख न देखा जा रहा
मेरी कहानी शायद मेरी अकेली की नहीं लगती
बहुत लड़कियां हैं जो मुझसे ज्यादा दुख में पलती
रणबीर

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