साक्षरता आंदोलन के दौरान के कुछ नारे इस प्रकार हैं
1
जहां कहीं भी लोकतंत्र है
शिक्षा उसका मूल मंत्र है
2
गीता बाइबिल ग्रंथ कुरान
सबसे पहले अक्षर ज्ञान
3
आंखों से अक्षर पहचानो
साक्षर होकर जग को जानो
4
साक्षरता में सहयोग करें
दूर देश का रोग करें
5
हम सबकी है जिम्मेदारी
पढ़ी-लिखी हो जनता सारी
6
अनपढ़ रहकर खाया धोखा
बहुत हो चुका अब ना होगा
7
छोड़ो अब यह लापरवाही
हालात बदलो पढ़ कर भाई
8
अनपढ़ता का लदा ये बोझ
दुगना होता जाता रोज
9
पढ़ो और बढ़ाओ
उन्नत देश बनाओ
10
साक्षरता अब नहीं तो कब?
हरियाणा का यह अरमान
11
पढ़ा लिखा हो हर इंसान
जगे देश की क्या पहचान
12
जब तक पढ़ पढ़ न सकेगा
देश भी आगे बढ़ न सकेगा
13
समय की यही पुकार
शिक्षा का हो खूब प्रचार
14
अंधकार को क्यों धिक्कारें
अच्छा है एक दीप जलालें
15
खेती समरै नलाई तैं
जिंदगी समरैपढ़ाई तैं
16
खेती करो चाहे मजदूरी
पढ़ाई लिखाई सबसे जरूरी
17
पढ़ो लिखो खुद को पहचानो
जाग उठो मजदूर किसानो
18
पढ़ने में कोई शर्म नहीं
पढ़ने की कोई उम्र नहीं
19
बच्चा बुढ़ा और जवान
पढ़ा लिखा हो हर इंसान
20
भूख गरीबी नहीं मिटेगी
जब तक जनता नहीं पढेगी
21
खुशहाली खात्तर लड़ां लड़ाई
अनपढ़ सारे करां पढ़ाई
22
गांम-गांम मैं समिति आई
पढ़ ल्यो चाची पढ़ ल्यो ताई
23
ज्ञान विज्ञान में आना होगा
बिना पढ़े पछताना होगा
24
नर नारी की ये आवाज
पढ़ा लिखा हो आज समाज
25
व्यापार नौकरी लिया करो दुकान
सबसे पहले अक्षर ज्ञान
26
आओ मिलकर पढ़े पढ़ाएं
अपने ज्ञान को और बढ़ाएं
27
आधी बाजी जीत चुके
अब बाकी बाजी जीतेंगे
25
मिटे गरीबी और अज्ञान
पढ़ा लिखा हो हर इंसान
29
जरा सी पढ़ाई
ढेर सी भलाई
30
जगह देश की क्या पहचान
पढ़ा लिखा मजदूर किसान
31
उमर नहीं होती है बाधा
गर हो पढ़ने का ठोस इरादा
32
अक्षर से मिल कर साक्षर हो जाओ
नई जिंदगी के लिए कलम उठाओ
33
पढ़े चलो पढ़े चलो
ज्ञान की डगर पे बढ़े चलो
34
सुख दुख में अब होंगे साथ
अक्षर गढ़ने वाले हाथ
35
अंगूठा टेक
पढ़े हरेक
36
जीवन के सुख का आधार
पढ़ा लिखा हो हर परिवार
37
पढ़ना सीखा लिखना सीखो
हक की खातर लड़ना सीखो
38
धरती पर है स्वर्ग वहां
पढ़ा लिखा परिवार जहां
39
पढ़ लिख कर सुधरें सब काज
विकसित होगा तभी समाज
40
जात-पात के मिटें निशान
पढ़ो लिखो बढ़ाओ ज्ञान
41
शिक्षा से अन्याय मिटेगा
भाईचारा और बढ़ेगा
42
पिछलेपन का एक इलाज
पढ़ा लिखा हो पूर्ण समाज
43
पढ़ लिखकर जब बढ़ेगा ज्ञान
तभी बनेंगे सफल किसान
44
पूरी होगी तभी तो इच्छा
जन-जन में जब होगी शिक्षा
44
पढ़े लिखों के वास्ते
खुले हजारों रास्ते
45
पढ़ेंगे और पढ़ाएंगे
देश को आगे बढ़ाएंगे
46
नवयुग का निर्माण करेंगे
हम सब मिलकर आज पढ़ेंगे
47
आने वाला कल हमारा
साक्षरता है बल हमारा
48
हाथ बढ़ाओ हाथ बंटाओ
अनपढ़ता को दूर भगाओ
49
शब्द साधना से बढ़ाओ ज्ञान
अंधविश्वास का मिटे निशान
50
बच्चों को लाड और प्यार दें
साथ शिक्षा का उपहार दें
51
पापा जी न पियो शराब
मुझे भी ला दो एक किताब
52
स्कूल है अपना बच्चे अपने
मिल- जुल संवारें इन के सपने
53
अभिभावक अध्यापक संघ
शिक्षा का जरूरी अंग
54
मां-बाप जब होंगे शिक्षित
बच्चे प्रगति करेंगे निश्चित
55
छोड़ दो इस भूल को
बच्चा भेजो स्कूल को
56
शिक्षा हमें जगाती है
शोषण से बचाती है
57
आओ पढ़ें
आगे बढ़ें
58
पढ़ो लिखो मजदूर किसानों
चेतन हो अपने हक जानो
59
चौका बर्तन और सफाई
पहले औरत करें पढ़ाई
60
भाई भी घर का काम कराए
तभी तो बहना पढ़ने जाए
61
मैं हूं छोटी सबला
मत कहो मुझे बोझ और अबला
62
बेटी पढ़े
पीढ़ी तरे
63
पढ़ी लिखी है घर की माता
बच्चों की है भाग्य विधाता
64
नारी शिक्षित गर हो जाए
नई दिशा सब को दिखलाए
65
नारी पढ़ी सब घर पढ़ा पुरुष पढ़ा तो एक
नारी शिक्षा जानिए जन शिक्षा की टेक
66
बेटा - बेटी में क्यों अंतर?
समान शिक्षा एक सा अवसर
67
पढ़ी-लिखी लड़की
रोशनी है घर की
68
बेटी पढ़े किसान की
जय हो हिंदुस्तान की
69
हर बेटी का यह अधिकार
पूरी शिक्षा पूरा प्यार
70
सास बहू जब साथ पढ़ेंगी
उन्नति की राह गढ़ेंगी
71
नर नारी हो पढ़ी लिखी
पूरा हो परिवार सुखी
72
अब ना कहो कोई मजबूरी
नारी शिक्षा है बहुत जरूरी
73
घूंघट एक अंधेरा है
पढ़ना नया सवेरा है
74
महिलाएं जब होगी साथ
होंगे सबल राष्ट्र के हाथ
75
कहता साक्षरता अभियान
लड़का लड़की एक समान
76
बंद करो यह दहेज कहानी
पढ़ी लिखी हो दुल्हन रानी
77
न लेना न देना दहेज
साक्षरता का यह संदेश
78
सारे मिलकर बोले हम
लड़की ना लड़के से कम
79
औरत भी जिंदा इंसान
नहीं भोग का वह सामान
80
घर बाहर का काम करेंगी
पंचायत में भी न्याय करेंगी
81
आओ बहना साथ चलें
मिलजुलकर संघर्ष करें
82
सवाल है नारी की पहचान का
सवाल है नारी के सम्मान का
83
चूल्हा चौंका चारदीवारी
हम पर ढेरों जिम्मेदारी
84
बहुत सहा है अब ना सहेंगी
अपने हक हम पढ कर लेंगी
85
कच्ची उम्र में शादी
है बेटी की बर्बादी
86
जो भ्रूण हत्या में भागी है
मानवता का अपराधी है
87
दहेज नहीं बेटी को प्यार दो
संपत्ति और शिक्षा का अधिकार दो
88
बेटी करती ज्यादा काम
दो उसको पूरा सम्मान
89
सक्षम भारत तक की दूरी
शिक्षित महिला करेगी पूरी
90
पिटती पत्नी बिकते जेवर
बदल शराबी अपने तेवर
91
महिला दलित और वंचित तबके
एक बराबर हों हक सबके
92
हम औरतों का है यह नारा
सब जंगों से हो छुटकारा
93
आओ बहनों एक हो जाएं
धर्म जाति के भेद मिटाएं
94
अपने हक की लड़ा लड़ाई खुद ने भी पहचानां पढ़ना लिखना सीख गए इब सारी दुनिया जाना
95
ना मास्टर जी का डंडा हो ना बस्ते का बोझ
रोज नया कुछ सीखें हम रोज करें इक खोज
96
हर दिन हो किताब का दिन
काम चले न इसके बिन
97
सुंदर समाज बनाए
पढ़िए और पढ़ाइए
98
किताबें करती हैं बातें जगत जहांन की
इनसे से जलती है दुनिया में ज्योति ज्ञान की
99
दूर होवै अंधियारा कब
हो पुस्तक का उजियारा जब
100
शिक्षा कला और विज्ञान
इनमें निहित है उत्थान
101
रोज-पढ़ो विचार करो
अज्ञान का दूर अंधकार करो
102
किताबों का संसार
है ज्ञान का भंडार
103
किताबों से अपनाते जोड़े
कुरीतियों का घेरा तोड़ें
104
किताबें कुछ कहना चाहती हैं
तुम्हारे पास रहना चाहती हैं
105
कोई हमारे हाथ में ऐसी किताब दे
उलझे हुए सवाल का सीधा जवाब दे
106
पढ़ना लिखना बोझ नहीं है हमने ये पहचान लिया धरती अंबर सागर झरने सब अपने हैं जान लिया
107
बाहर भीतर का अंधियारा
शिक्षा से होगा उजियारा
108
चलो किताबें बांच-बांच के सब के बीच सुणावा सीख गए जो पढणा लिखना उनपै भी बंचवावां
109
अंधकार में सूरज बनकर
सबको दे उजियारा पुस्तक
जब भी भटकें सही दिशा से
बने भोर का तारा पुस्तक
110
घर-घर में शौचालय हो
गांव गांव में पुस्तकालय हो
111
पंचायत की मीटिंग महीने में दो
ग्राम सभा की छ: महीने में हो
112
स्वच्छ पानी और गलियां साफ
मिलजुल कर हम करें प्रयास
113
पढ़ लिख बात समझ में आई
तरक्की कोन्या बिना पढ़ाई
114
साक्षरता नै ज्ञान दिया सै
हौसला हक और मान दिया सै
115
स्मैक शराब और पान तंबाकू
सुख समृद्धि और धन के डाकू
116
पढ़ लिख हमने बताया ज्ञान
स्वास्थ्य का भी अब रखें ध्यान
117
पहला कदम था अक्षर ज्ञान
समाज सुधार पर अब देंगे ध्यान
118
पढ़ लिख यह संदेश पहुंचाएं
बचपन में ना ब्याह रचाएं
119
चरस अफीम और शराब
इनसे होता घर बर्बाद
120
आजादी का असली नाम
अपना निर्णय अपना काम
121
ऊर्जा को न व्यर्थ गंवाओ
जितनी जरूरत उतनी जलाओ
122
मंदिर मस्जिद कहीं रहे
देश का एक बना रहे
123
सब रंगों का समावेश
भारत देश हमारा देश
124
सद्भाव की सजे रंगोली
साथ मनाएं ईद और होली
125
पढ लिख गया मजदूर किसान
पाई हिम्मत पाया ज्ञान
126
सुख और दुख में साथ रहेंगे
जात धर्म पर नहीं बंटेंगे
127
ना लड़िए न लड़ाइए
पढ़िए और पढ़ाइए
128
शिक्षा और खेती
यही राष्ट्र की प्रगति
129
विज्ञान का ज्ञान बढ़ता है
अंध विश्वास मिटाना है
130
जन-जन जाने विज्ञान
जन जन माने विज्ञान
132
ज्ञान विज्ञान अपनाना होगा
अंधविश्वास मिटाना होगा
133
ना देंगे ना विनाश चाहिए
शांति और विकास चाहिए
134
पूरी दुनिया अपनी है
आओ इसे न्याय संगत बनाएं
135
जन शिक्षा का लक्ष्य अगर पाना है
हरेक हाथ में पुस्तक को पहुंचना है
136
सतत शिक्षा को अपनाइए
सुंदर समाज बनाइए
137
सतत शिक्षा केंद्र में आओ
पढ़ लिख अपनी समझ बढ़ाओ
138
पढ़ना तुम पढाना तुम चांद से आगे जाना तुम
सारी दुनिया अपनी है बस बाहें फैलाना तुम
139
वक्त अभी है अभी भी संभालो
गांव को जानो, गांव को बदलो
140
एक दूजे से सीखेंगे और आगे बढ़ते जाएंगे
जो पीछे हैं उनको भी हम अपने साथ मिलाएंगे
141
चर्चा मंडल पुस्तकालय और जनवाचन अपनाना है
जन-जन के सशक्तिकरण का लक्ष्य हमको पाना है
142
पढ़ना लिखना सीख लिया अब, चर्चा मंडल जाएंगे पढ़ेंगे पुस्तक करेंगे चर्चा बेहतर गांव बनाएंगे
143
जिंदगी भर सीखना सीखाना है
संवाद की प्रक्रिया को अपनाना है
144
सबको मिलें विकास के अवसर पूरे ऐसा संवेदनशील समाज बनाना है जय हिंद
******
“जो विचारों मे जिंदा रहते है वह कभी मरते नहीं”
अलविदा ड़ा शंकर लाल, सलाम, जिंदाबाद
हरियाणा मे ज्ञान - विज्ञान के मूल्यों पर आधारित नवजागरण के सजग प्रहरी और कर्मठ एवं समर्पित, नए हरियाणा का स्वप्न्न देखने वाले, भारतीय सविधान मे प्रदत बराबरी (जाती व धर्म, महिला पुरुष,) देश मे बढ़ती आर्थिक गैर बराबरी, यानि आर्थिक, सामाजिक व राजनैतिक तौर पर फ़ैली गैर बराबरी के खिलाफ डटकर लड़ने वाले वैज्ञानिक समझ के व्यक्तितव के धनी ड़ा. शंकर से मेरा परिचय 17 सितंबर 1990 मे हुआ था जब मै 16 वर्ष का था। व एक ग्रामीण बच्चो की तरह ही संसार को समझता था। उनसे मुलाक़ात पानीपत की चौथी लड़ाई (निरक्षरता के खिलाफ जंग) के समय हुई जब वह हमारे स्कूल मे सभी बच्चों के साथ साक्षरता अभियान के लिए स्वेछिक रूप से जुडने की अपील करने आए थे। उस समय बस इतना आभास सा था की समाज मे जो हो रहा है उसमे कुछ गड़बड़ है हमे कुछ करना चाहिए। उस समय पानीपत की चौथी लड़ाई के अगुवा साथियो मे पानीपत जिले मे डाक्टर शंकर, ड़ा सुरेश शर्मा व राजेश आत्रेय हुआ करते थे। ड़ाक्टर साहब के उस समय के साथ ने जिंदगी के मायने, सोचने के तरीके, मान्यताएँ सभी कुछ बदल दिया। मेरे जैसे कितने ही साक्षरताकर्मी है जिनकी जिंदगी मे बदलाव आया है व वैज्ञानिक समझ पैदा हुई है। यह श्र्देय डाक्टर साहब का ही योगदान की आज हम देश, दुनिया मे कही भी रहे लेकिन समाज बदलाव व समाज मे वैज्ञानिक समझ के पैदा करने का प्रयास निरंतर जारी है। और जारी रहेगा।
वैचारिक, मानसिक, दोस्त - गुरु डाक्टर शंकर लाल अलविदा सलाम, जिंदाबाद
*****
जल्दी करते-करते भी रात का एक बजे ही गया था। अगली सुबह समालखा के रास्ते पर थे। मैंने नोटिस किया कि सड़क किनारे बस की प्रतीक्षा करतीं कुछ महिलाएं और लड़कियां दुप्पटे से अपने सिर सहित, अपने चेहरे को भी ढके हुई थीं, लगभग घूंघट के अंदाज में। उन्हें देखकर हरियाणा की खाप पंचायतों के बारे में सुनी -पढ़ी बातें याद आती रहीं। सुकून की बात यह थी कि वे घर से बाहर तो निकल रहीं थीं।
समालखा में भारत ज्ञानविज्ञान समिति द्वारा संचालित जीवनशाला के बच्चों और अध्यापकों से मिलना था। 1990 के दशक में हरियाणा का पानीपत जिला साक्षरता अभियान के लिए देश भर में मशहूर था। वहां इस अभियान को पानीपत की चौथी लड़ाई का नाम दिया गया था। पानीपत के अभियान ने हरियाणा के अन्य जिलों को भी प्रभावित किया था। 1997 के आसपास भारत ज्ञानविज्ञान ने जीवनशाला की नींव डाली। इन शालाओं में वे बच्चे पढ़ने आते थे, जो किसी कारण विशेष से सरकारी स्कूलों से बाहर आ गए थे, या बाहर रह गए थे। उद्देश्य था इन बच्चों को एक-दो साल की तैयारी के बाद पुन: सरकारी स्कूलों में भेजना। जीवनशालाएं सफल हुईं। लेकिन आंदोलन का रूप नहीं ले पाईं। समालखा विकासखंड में दो जीवनशालाएं अब भी चल रही हैं। हालांकि इनकी स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। समालखा के पास हथवाला में गांव की चौपाल में 40 बच्चे और दो अध्यापक जीवनशाला में हमें मिले। उनका उत्साह देखते ही बनता था। बच्चे और अध्यापक दोनों ही हमारी उपस्थिति के बावजूद सहज थे। बच्चों से बातचीत हुई, अध्यापकों से भी। यहां की जीवनशाला शहीद वीरेन्द्र स्मारक समिति द्वारा संचालित की जाती है। वीरेन्द्र साक्षरता अभियान के सक्रिय कार्यकर्त्ता थे। 1992 में एक टैंकर में लगी आग से लोगों को बचाते हुए वे शहीद हो गए थे।
उनकी याद में एक पुस्तकालय भी संचालित किया जाता है। हम उस पुस्तकालय में भी गए और उसके कुछ सक्रिय पाठकों से भी मिले। मैंने अपने कविता संग्रह ‘वह, जो शेष है’ कि एक प्रति पुस्तकालय को भेंट की।
*
दोपहर बाद हम समालखा में थे केन्द्रीय जीवनशाला में। यह अब जीवंत नहीं है यानी अब यहां कोई शाला नहीं चल रही है। यद्यपि बच्चे अभी भी यहां रहते हैं, पर वे पढ़ने सरकारी स्कूल या कॉलेज में जाते हैं। यहां से पढ़कर बाहर निकले 18 युवक-युवतियां एकत्रित हुए थे। उनमें से हरेक की कहानी अपने आप में एक अनुभव था। एक युवती और एक युवक अपना अनुभव सुनाते-सुनाते भावावेश में रो पड़े। इसे भी वीरेन्द्र स्मारक समिति संचालित करती है। इसके कार्यकर्त्ता अभी भी इस कोशिश में लगे हैं कि इस फिर से शुरू किया जाए। यहां भी एक पुस्तकालय संचालित है। अपने संग्रह की एक प्रति मैंने यहां भी भेंट की।
********
आदर्श वरिष्ट माध्यमिक विद्यालय देहरा व बसाड़ा में "सूरत बदलनी चाहिए "
नाटक का थीम धर्मान्धता,अंधविश्वास, साम्प्रदायिकता जातिवाद, सामाजिक आर्थिक असमानता, नारी उत्पीड़िन, बलात्कार, लम्पट पथप्रष्ट युवा, बेरोजगारी व व्यवस्था में मौजूद अकूत भ्र्ष्टाचार आदि विसंगतियों पर केंद्रित रहा।
नाटक का जोरदार मंचन SHG से जुड़ी सैकड़ों महिलाओं व पंचायत के द्वारा पूरा प्रबनधन तथा उत्साहवर्धक तरीके से जत्थे का स्वागत करते हुए, स्कूल से रिटायर्ड प्राचार्य अजमेर जी ने नाटक के उद्घाटन सत्र में विचार साझा किये। बतौर मुख्य वक्ता देश के जाने माने जन विज्ञान आंदोलन प्रमुख प्रणेता डॉ रणबीर सिंह दहिया जी ने मौजूदा दौर में देश और समाज के सामने मौजूद समस्याओं का खुलासा करते हुए व उनके समाधान में अनपढ़ता के खात्मे से शुरू हुई पानीपत की चौथी लड़ाई द्वारा ज्ञान विज्ञान आंदोलन की ऐतिहासिक भूमिका को रेखांकित करते हुए आज पुनः सबको एकजुट होकर ज्ञान विज्ञान आंदोलन को मजबूत करने का जन प्रेरक आह्वान किया।
डा शंकर लाल व मास्टर रणधीर सिंह जागलान (ईसराना) व डॉ नवमीत तथा डा. बी वी अबरोल,करनाल से, राज पाल दहिया की गरिमामय उपस्थिति, सूबे गोपीचंद देशवाल, जयप्रकाश सरपंच राकसेडा, गौरव कुमार संरपंच बसाडा आदि सभी पूरा दिन जत्थों की प्रस्तुतियों में शामिल रहे। कृषि वैज्ञानिक डा राजबीर गर्ग ने बसाड़ा में उद्घाटन सत्र में महिला किसानों के जीवन पर विचार साझा किए। रागनी गायक कवर सिह व शीशपाल की आवाज में श्री मंगत राम शास्त्री 【जींद】द्वारा लिखित इस सिस्टम की बदमाशी का आज पाटगया तोल भाई और पीवै सै रोज दारू होगया शराबी री मां दो रागनियों ने समा बांध दिया।
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पानीपत की चौथी लड़ाई
सारे मिलकर करैं पढ़ाई
शायद मतलौडा ब्लॉक की वर्कशॉप थी टीचर्स और अक्षर सैनिकों कि primar निरक्षरों की क्लास में कैसे पढ़ना पढ़ाना है । एक पाठ बरसात कैसे होती है इस पर था । कैसे सूर्य की गर्मी और पानी के वाष्पीकरण से बादल बनते हैं और बरसात होती है। एक अध्यापक महोदय ने कहा यह गलत है, बरसात तो हवन करने से होती है ।
हमारे साथी ने उसे और ज्यादा सहजता के साथ समझाया कि बरसात के पीछे क्या क्या वैज्ञानिक मसले हैं । मास्टरजी तो अड़े रहे। फिर हमारे साथी ने पूछा-मास्टरजी आपका बच्चा कौनसी क्लास में पढता है?
जवाब था-- आठवीं में।
साथी-- यदि उसके एग्जाम में यह सवाल आ जाय कि बरसात कैसे होती है तो आप उसे क्या सलाह देंगे
मास्टरजी-- उसे तो मैं यही कहूंगा कि बरसात बादलों से होती है यही लिख कर आना।
साथी से रहा नहीं गया और कहा- फूफा फेर आध घण्टे तैं म्हारा सिर क्यूँ खान लागरया सै।
यूं ही याद आयी पानीपत की चौथी लड़ाई जो 1990 में शुरू की और अब तक जारी है ।
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. एक किसान एक एकड़ में कितना गन्ना पैदा करता है ?
2 एक क्विन्टल गन्ने में कितनी चिन्नी बनती है ?
3 . कितना शीरा बनता है ?
4 . कितनी खोही बनती है ?
5 . इनसे आगे एक किलो शीरा से एक दारू की बोतल बनती है ।
6 . इसी प्रकार खोही से कापी पेन्सिल और बिजली बनती है ।
क्या कोई किताब है ऐसी जिसमें इसका पूरा हिसाब किया गया हो ?
1990-92 में पानीपत की चौथी लड़ाई नाम से साक्षरता अभियान में ये सवाल लोगों ने उठाये थे । मैंने दो साल वहां काम किया था \
तब से उस किताब को ढूंढ रहा हूँ ? आपके पास हो तो एक कापी मुझे भी भेजना जी । ----