रविवार, 6 जुलाई 2025

पुरानी यादें


देवी अहिल्याबाई होल्कर भारत के मराठा मालवा राज्य की होलकर रानी थीं। उन्होंने अपनी राजधानी महेश्वर में स्थापित की और अपने शासनकाल के दौरान राज्य को समृद्ध बनाया। 

अहिल्याबाई का जन्म 31 मई 1725 को महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के चौंडी गांव में हुआ था। उनके पिता मनकोजी राव शिंदे थे। उनका विवाह 10-12 वर्ष की आयु में खंडेराव होलकर से हुआ था। उनतीस वर्ष की अवस्था में विधवा हो गईं। 

अहिल्याबाई ने अपने ससुर मल्हार राव होलकर की मृत्यु के बाद 1767 में रीजेंट के रूप में शासन संभाला और बाद में होलकर राज्य की शासक बनीं। 

उन्होंने राज्य को आक्रमणकारियों से बचाया और अपनी प्रजा की रक्षा के लिए युद्ध में सेनाओं का नेतृत्व किया। 

उन्होंने न्याय, प्रशासन और लोगों की भलाई के लिए कई सुधार किए। 

उन्होंने सामाजिक सुधारों और धर्म के प्रति अपनी निष्ठा दिखाई। 
उन्होंने पूरे भारत में मंदिरों, धर्मशालाओं और अन्य सार्वजनिक निर्माण कार्यों का निर्माण किया। 

उन्होंने महेश्वर में वस्त्र उद्योग स्थापित किया, जो बाद में अपनी महेश्वरी साड़ियों के लिए प्रसिद्ध हुआ। 

उन्होंने संस्कृति, कला और साहित्य को बढ़ावा दिया। 

अहिल्याबाई की मृत्यु 13 अगस्त 1795 को महेश्वर में हुई। उन्हें एक महान शासक, सुप्रभारी और सामाजिक सुधारक के रूप में याद किया जाता है। उनकी न्यायप्रियता, दयालुता, और राष्ट्र के प्रति समर्पण के कारण उन्हें "पुण्यश्लोक" (पवित्र मंत्रों की तरह शुद्ध) कहा जाता  है।






















पुरानी यादें


देवी अहिल्याबाई होल्कर भारत के मराठा मालवा राज्य की होलकर रानी थीं। उन्होंने अपनी राजधानी महेश्वर में स्थापित की और अपने शासनकाल के दौरान राज्य को समृद्ध बनाया। 

अहिल्याबाई का जन्म 31 मई 1725 को महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के चौंडी गांव में हुआ था। उनके पिता मनकोजी राव शिंदे थे। उनका विवाह 10-12 वर्ष की आयु में खंडेराव होलकर से हुआ था। उनतीस वर्ष की अवस्था में विधवा हो गईं। 

अहिल्याबाई ने अपने ससुर मल्हार राव होलकर की मृत्यु के बाद 1767 में रीजेंट के रूप में शासन संभाला और बाद में होलकर राज्य की शासक बनीं। 

उन्होंने राज्य को आक्रमणकारियों से बचाया और अपनी प्रजा की रक्षा के लिए युद्ध में सेनाओं का नेतृत्व किया। 

उन्होंने न्याय, प्रशासन और लोगों की भलाई के लिए कई सुधार किए। 

उन्होंने सामाजिक सुधारों और धर्म के प्रति अपनी निष्ठा दिखाई। 
उन्होंने पूरे भारत में मंदिरों, धर्मशालाओं और अन्य सार्वजनिक निर्माण कार्यों का निर्माण किया। 

उन्होंने महेश्वर में वस्त्र उद्योग स्थापित किया, जो बाद में अपनी महेश्वरी साड़ियों के लिए प्रसिद्ध हुआ। 

उन्होंने संस्कृति, कला और साहित्य को बढ़ावा दिया। 

अहिल्याबाई की मृत्यु 13 अगस्त 1795 को महेश्वर में हुई। उन्हें एक महान शासक, सुप्रभारी और सामाजिक सुधारक के रूप में याद किया जाता है। उनकी न्यायप्रियता, दयालुता, और राष्ट्र के प्रति समर्पण के कारण उन्हें "पुण्यश्लोक" (पवित्र मंत्रों की तरह शुद्ध) कहा जाता  है।






















silence for Gaza

*Silence for Gaza*

Starting today 
LOCAL TIME ZONE from***21:00 (9PM)** to ***21:30 (9:30PM)*, I will turn off my mobile phone.
In the strongest form of internet disconnection, from 21:00 (9PM) to 21:30 (9:30 PM) for one week—for the Palestinian people.

30 minutes of digital silence

THIS IS A coordinated digital campaign of the “Silence for Gaza” movement was launched. It is a growing wave.

Because something can be done: a daily digital break for 30 minutes every evening, from 21:00 (9:00PM) to 21:30 (9:30 PM) local time in each country.

During this break:
No social media.
No messages.
No comments.
Phones and computers are turned off.

This collective action will send a strong digital signal to the algorithms, and show our solidarity with Gaza.
(It’s not easy—but let’s do something. That’s what matters.)

The idea:
Every day, at the same time, millions of users around the world go completely silent on social media for 30 minutes.
No posts.
No likes.
No comments.
No opening apps.
Complete digital silence. Turn off your phone.

It is an act of resistance—a global digital protest.

The anger of so many citizens in the face of immense injustice.

Because something can be done: simple and effective.

Remember 21:00 (9PM) digital silence.
(Set an alarm on your phone: 21:00 (9PM) reminder.)


Technical Explanation:

1. Algorithmic Impact
Social media platforms depend on constant user activity.
We are the ones who keep the system running.
A sudden, synchronized drop in activity—even for a short time—can:
(a) disrupt visibility algorithms.
(b) affect real-time traffic statistics.
(c) send a technical signal to servers about abnormal user behavior.
This act highlights a citizen resistance to injustice, which until now was fueled by our passivity.

2. Symbolic Impact
In a hyperconnected world, digital silence is a powerful statement.
It creates a stark contrast between the noise of social media and the forced silence in Gaza.
It’s a moment of collective reflection.

3. Social Impact
If the action is widespread, leaders will see that citizens reject the crime in Gaza—
And only then will they move.

We aim to create a progressive wave that spreads worldwide 🌎.

रविवार, 22 जून 2025

सैमन कैंप

स्वास्थ्य कैंप सैमन 
महम  के सैमन गांव में जन स्वास्थ्य अभियान रोहतक की तरफ से आज  22 जून इतवार को   10.00 बजे से लेकर बाद दोपहर 1.30 बजे तक फ्री हेल्थ कैंप का आयोजन किया गया । जिसमें 47 मरीजों का निरीक्षण किया गया और दवाएं दी गई। ब्लड प्रेशर और शुगर भी टेस्ट किए कुछ मरीजों के। एच बी भी कुछ मरीजों का टेस्ट किया। वजीर सिंह और गान के कई लोगों ने काफी सहयोग दिया ।
निम्नलिखित टीम ने कैंप में हिस्सेदारी की
डॉ मग्गू हड्डी रोग विशेषज्ञ
डॉ भौमिक सिंह जनरल प्रैक्टिशनर 
डॉ रीतू फोगट डेंटिस्ट
डॉ रणबीर दहिया
प्रसन्नता जी नेत्र क्षेत्र 
मधु जी जे एस ए एक्टिविस्ट 
रणबीर कादियान , धर्मवीर राठी, प्रेम सिंह जून, मोहिंदर सिवाच और आजाद सिंह रिटायर्ड फार्मासिस्ट

बुधवार, 18 जून 2025

साक्षरता आंदोलन नारे

साक्षरता आंदोलन के दौरान के कुछ नारे इस प्रकार हैं 
1
जहां कहीं भी लोकतंत्र है 
शिक्षा उसका मूल मंत्र है 
2
गीता बाइबिल ग्रंथ कुरान 
सबसे पहले अक्षर ज्ञान
3
आंखों से अक्षर पहचानो 
साक्षर होकर जग को जानो
4
साक्षरता में सहयोग करें 
दूर देश का रोग करें 
5
हम सबकी है जिम्मेदारी 
पढ़ी-लिखी हो जनता सारी
6
अनपढ़ रहकर खाया धोखा 
बहुत हो चुका अब ना होगा 
7
छोड़ो अब यह लापरवाही 
हालात बदलो पढ़ कर भाई 
8
अनपढ़ता का लदा ये बोझ
 दुगना होता जाता रोज
9
पढ़ो और बढ़ाओ 
उन्नत देश बनाओ 
10
साक्षरता अब नहीं तो कब? 
हरियाणा का यह अरमान 
11
पढ़ा लिखा हो हर इंसान 
जगे देश की क्या पहचान 
12
जब तक पढ़ पढ़ न सकेगा 
देश भी आगे बढ़ न सकेगा 
13
समय की यही पुकार 
शिक्षा का हो खूब प्रचार 
14
अंधकार को क्यों धिक्कारें
अच्छा है एक दीप जलालें
15
खेती समरै नलाई तैं 
जिंदगी समरैपढ़ाई तैं 
16
खेती करो चाहे मजदूरी 
पढ़ाई लिखाई सबसे जरूरी 
17
पढ़ो लिखो खुद को पहचानो 
जाग उठो मजदूर किसानो
18
पढ़ने में कोई शर्म नहीं 
पढ़ने की कोई उम्र नहीं 
19
बच्चा बुढ़ा और जवान 
पढ़ा लिखा हो हर इंसान
20
भूख गरीबी नहीं मिटेगी 
जब तक जनता नहीं पढेगी
21
खुशहाली खात्तर लड़ां लड़ाई
अनपढ़ सारे करां पढ़ाई
22
गांम-गांम मैं समिति आई
पढ़ ल्यो  चाची पढ़ ल्यो ताई 
23
ज्ञान विज्ञान में आना होगा 
बिना पढ़े पछताना होगा 
24
नर नारी की ये आवाज 
पढ़ा लिखा हो आज समाज 
25
व्यापार नौकरी लिया करो दुकान 
सबसे पहले अक्षर ज्ञान 
26
आओ मिलकर पढ़े पढ़ाएं 
अपने ज्ञान को और बढ़ाएं 
27
आधी बाजी जीत चुके 
अब बाकी बाजी जीतेंगे
25
मिटे गरीबी और अज्ञान 
पढ़ा लिखा हो हर इंसान 
29
जरा सी पढ़ाई 
ढेर सी भलाई 
30
जगह देश की क्या पहचान 
पढ़ा लिखा मजदूर किसान 
31
उमर नहीं होती है बाधा 
गर हो पढ़ने का ठोस इरादा 
32
अक्षर से मिल कर साक्षर हो जाओ 
नई जिंदगी के लिए कलम उठाओ 
33
पढ़े चलो पढ़े चलो 
ज्ञान की डगर पे बढ़े चलो 
34
सुख दुख में अब होंगे साथ 
अक्षर गढ़ने वाले हाथ
35
अंगूठा टेक 
पढ़े हरेक 
36
जीवन के सुख का आधार 
पढ़ा लिखा हो हर परिवार 
37
पढ़ना सीखा लिखना सीखो 
हक की खातर लड़ना सीखो 
38
धरती पर है स्वर्ग वहां 
पढ़ा लिखा परिवार जहां 
39
पढ़ लिख कर सुधरें सब काज
विकसित होगा तभी समाज 
40
जात-पात के मिटें निशान 
पढ़ो लिखो बढ़ाओ ज्ञान 
41
शिक्षा से अन्याय   मिटेगा 
भाईचारा और बढ़ेगा
42
पिछलेपन का एक इलाज 
पढ़ा लिखा हो पूर्ण समाज 
43
पढ़ लिखकर जब बढ़ेगा ज्ञान 
तभी बनेंगे सफल किसान 
44
पूरी होगी तभी तो इच्छा 
जन-जन में जब होगी शिक्षा 
44
पढ़े लिखों के वास्ते 
खुले हजारों रास्ते 
45
पढ़ेंगे और पढ़ाएंगे 
देश को आगे बढ़ाएंगे 
46
नवयुग का निर्माण करेंगे 
हम सब मिलकर आज पढ़ेंगे
47
आने वाला कल हमारा 
साक्षरता है बल हमारा 
48
हाथ बढ़ाओ हाथ बंटाओ 
अनपढ़ता को दूर भगाओ 
49
शब्द साधना से बढ़ाओ ज्ञान 
अंधविश्वास का मिटे निशान 
50
बच्चों को लाड और प्यार दें 
साथ शिक्षा का उपहार दें 
51
पापा जी न पियो शराब 
मुझे भी ला दो एक किताब 
52
स्कूल है अपना बच्चे अपने
मिल- जुल संवारें इन के सपने
53
अभिभावक अध्यापक संघ 
शिक्षा का जरूरी अंग 
54
मां-बाप जब होंगे शिक्षित 
बच्चे प्रगति करेंगे निश्चित 
55
छोड़ दो इस भूल को 
बच्चा भेजो स्कूल को 
56
शिक्षा हमें जगाती है
शोषण से बचाती है 
57
आओ पढ़ें 
आगे बढ़ें
58
पढ़ो लिखो मजदूर किसानों 
चेतन हो अपने हक जानो
59
चौका बर्तन और सफाई 
पहले औरत करें पढ़ाई 
60
भाई भी घर का काम कराए  
तभी तो बहना पढ़ने जाए 
61
मैं हूं छोटी सबला 
मत कहो मुझे बोझ और अबला
62
 बेटी पढ़े 
पीढ़ी तरे 
63
पढ़ी लिखी है घर की माता 
बच्चों की है भाग्य विधाता 
64
नारी शिक्षित गर  हो जाए 
नई दिशा सब को दिखलाए
65
नारी पढ़ी सब घर पढ़ा पुरुष पढ़ा तो एक 
नारी शिक्षा जानिए जन शिक्षा की टेक 
66
बेटा - बेटी में क्यों अंतर?
समान शिक्षा एक सा अवसर
67
पढ़ी-लिखी लड़की 
रोशनी है घर की
68
बेटी पढ़े किसान की
जय हो हिंदुस्तान की 
69
हर बेटी का यह अधिकार 
पूरी शिक्षा पूरा प्यार
70
सास बहू जब साथ पढ़ेंगी 
उन्नति की राह गढ़ेंगी 
71
नर नारी हो पढ़ी लिखी 
पूरा हो परिवार सुखी 
72
अब ना कहो कोई मजबूरी 
नारी शिक्षा है बहुत जरूरी 
73
घूंघट एक अंधेरा है 
पढ़ना नया सवेरा है 
74
महिलाएं जब होगी साथ 
होंगे सबल राष्ट्र के हाथ 
75
कहता साक्षरता अभियान 
लड़का लड़की एक समान 
76
बंद करो यह दहेज कहानी 
पढ़ी लिखी हो दुल्हन रानी 
77
न लेना न देना दहेज 
साक्षरता का यह संदेश 
78
सारे मिलकर बोले हम 
लड़की ना लड़के से कम 
79
औरत भी जिंदा इंसान 
नहीं भोग का वह सामान 
80
घर बाहर का काम करेंगी
पंचायत में भी न्याय करेंगी
81
आओ बहना साथ चलें 
मिलजुलकर संघर्ष करें 
82
सवाल है नारी की पहचान का 
सवाल है नारी के सम्मान का 
83
चूल्हा चौंका चारदीवारी 
हम पर ढेरों जिम्मेदारी 
84
बहुत सहा है अब ना सहेंगी 
अपने हक हम पढ कर लेंगी
85
कच्ची उम्र में शादी 
है बेटी की बर्बादी 
86
जो भ्रूण हत्या में भागी है 
मानवता का अपराधी है 
87
दहेज नहीं बेटी को प्यार दो 
संपत्ति और शिक्षा का अधिकार दो 
88
बेटी करती ज्यादा काम 
दो उसको पूरा सम्मान
89
सक्षम भारत तक की दूरी 
शिक्षित महिला करेगी पूरी 
90
पिटती पत्नी बिकते जेवर 
बदल शराबी अपने तेवर 
91
महिला दलित और वंचित तबके 
एक बराबर हों हक सबके 
92
हम औरतों का है यह नारा 
सब जंगों से हो छुटकारा 
93
आओ बहनों एक हो जाएं 
धर्म जाति के भेद मिटाएं 
94
अपने हक की लड़ा लड़ाई खुद ने भी पहचानां पढ़ना लिखना सीख गए इब सारी दुनिया जाना 
95
ना मास्टर जी का डंडा हो ना बस्ते का बोझ
 रोज नया कुछ सीखें हम रोज करें इक खोज 
96
हर दिन हो किताब का दिन 
काम चले न इसके बिन
97
सुंदर समाज बनाए 
पढ़िए और पढ़ाइए
98
किताबें करती हैं बातें जगत जहांन की 
इनसे से जलती है दुनिया में ज्योति ज्ञान की
99
 दूर होवै अंधियारा कब 
हो पुस्तक का उजियारा जब
100
शिक्षा कला और विज्ञान 
इनमें निहित है उत्थान
101
रोज-पढ़ो विचार करो 
अज्ञान का दूर अंधकार करो 
102
किताबों का संसार 
है ज्ञान का भंडार 
103
किताबों से अपनाते जोड़े
कुरीतियों का घेरा तोड़ें
104
किताबें कुछ कहना चाहती हैं 
तुम्हारे पास रहना चाहती हैं 
105
कोई हमारे हाथ में ऐसी किताब दे 
उलझे हुए सवाल का सीधा जवाब दे 
106
पढ़ना लिखना बोझ नहीं है हमने ये पहचान लिया धरती अंबर सागर झरने सब अपने हैं जान लिया 
107
बाहर भीतर का अंधियारा 
शिक्षा से होगा उजियारा 
108
चलो किताबें बांच-बांच के सब के बीच सुणावा सीख गए जो पढणा लिखना उनपै भी बंचवावां 
109
अंधकार में सूरज बनकर 
सबको दे उजियारा पुस्तक 
जब भी भटकें सही दिशा से 
बने भोर का तारा पुस्तक 
110
घर-घर में शौचालय हो 
गांव गांव में पुस्तकालय हो 
111
पंचायत की मीटिंग महीने में दो 
ग्राम सभा की छ: महीने में हो 
112
स्वच्छ पानी और गलियां साफ 
मिलजुल कर हम करें प्रयास 
113
पढ़ लिख बात समझ में आई 
तरक्की कोन्या बिना पढ़ाई 
114
साक्षरता नै ज्ञान दिया सै 
हौसला हक और मान दिया सै 
115
स्मैक शराब और पान तंबाकू 
सुख समृद्धि और धन के डाकू 
116
पढ़ लिख हमने बताया ज्ञान 
स्वास्थ्य का भी अब रखें ध्यान
117
पहला कदम था अक्षर ज्ञान 
समाज सुधार पर अब देंगे ध्यान 
118
पढ़ लिख यह संदेश पहुंचाएं 
बचपन में ना ब्याह रचाएं 
119
चरस अफीम और शराब 
इनसे होता घर बर्बाद 
120
आजादी का असली नाम 
अपना निर्णय अपना काम 
121
ऊर्जा को न व्यर्थ गंवाओ 
जितनी जरूरत उतनी जलाओ 
122
मंदिर मस्जिद कहीं रहे 
देश का एक बना रहे 
123
सब रंगों का समावेश 
भारत देश हमारा देश 
124
सद्भाव की सजे रंगोली 
साथ मनाएं ईद और होली 
125
पढ लिख गया मजदूर किसान 
पाई हिम्मत पाया ज्ञान 
126
सुख और दुख में साथ रहेंगे 
जात धर्म पर नहीं बंटेंगे
127
ना लड़िए न लड़ाइए 
पढ़िए और पढ़ाइए
128
शिक्षा और खेती 
यही राष्ट्र की प्रगति 
129
विज्ञान का ज्ञान बढ़ता है 
अंध विश्वास मिटाना है 
130
जन-जन जाने विज्ञान 
जन जन माने विज्ञान 
132
ज्ञान विज्ञान अपनाना होगा 
अंधविश्वास मिटाना होगा 
133
ना देंगे ना विनाश चाहिए 
शांति और विकास चाहिए 
134
पूरी दुनिया अपनी है 
आओ इसे न्याय संगत बनाएं 
135
जन शिक्षा का लक्ष्य अगर पाना है 
हरेक हाथ में पुस्तक को पहुंचना है 
136
सतत शिक्षा को अपनाइए 
सुंदर समाज बनाइए 
137
सतत शिक्षा केंद्र में आओ 
पढ़ लिख अपनी समझ बढ़ाओ 
138
पढ़ना तुम पढाना तुम चांद से आगे जाना तुम 
सारी दुनिया अपनी है बस बाहें फैलाना तुम
139
वक्त अभी है अभी भी संभालो 
गांव को जानो, गांव को बदलो 
140
एक दूजे से सीखेंगे और आगे बढ़ते जाएंगे 
जो पीछे हैं उनको भी हम अपने साथ मिलाएंगे
141
चर्चा मंडल पुस्तकालय और जनवाचन अपनाना है 
जन-जन के सशक्तिकरण का लक्ष्य हमको पाना है
142 
पढ़ना लिखना सीख लिया अब, चर्चा मंडल जाएंगे पढ़ेंगे पुस्तक करेंगे चर्चा बेहतर गांव बनाएंगे 
143
जिंदगी भर सीखना सीखाना है 
संवाद की प्रक्रिया को अपनाना है 
144
सबको मिलें विकास के अवसर पूरे ऐसा संवेदनशील समाज बनाना है जय हिंद

******

“जो विचारों मे जिंदा रहते है वह कभी मरते नहीं”
अलविदा ड़ा शंकर लाल, सलाम, जिंदाबाद 
हरियाणा मे ज्ञान - विज्ञान के मूल्यों पर आधारित नवजागरण के सजग प्रहरी और कर्मठ एवं समर्पित, नए हरियाणा का स्वप्न्न देखने वाले, भारतीय सविधान मे प्रदत बराबरी (जाती व धर्म, महिला पुरुष,) देश मे बढ़ती आर्थिक गैर बराबरी, यानि आर्थिक, सामाजिक व राजनैतिक तौर पर फ़ैली गैर बराबरी के खिलाफ डटकर लड़ने वाले वैज्ञानिक समझ के व्यक्तितव के धनी ड़ा. शंकर से मेरा परिचय 17 सितंबर 1990 मे हुआ था जब मै 16 वर्ष का था। व एक ग्रामीण बच्चो की तरह ही संसार को समझता था। उनसे मुलाक़ात पानीपत की चौथी लड़ाई (निरक्षरता के खिलाफ जंग) के समय हुई जब वह हमारे स्कूल मे सभी बच्चों के साथ साक्षरता अभियान के लिए स्वेछिक रूप से जुडने की अपील करने आए थे। उस समय बस इतना आभास सा था की समाज मे जो हो रहा है उसमे कुछ गड़बड़ है हमे कुछ करना चाहिए। उस समय पानीपत की चौथी लड़ाई के अगुवा साथियो मे पानीपत जिले मे डाक्टर शंकर, ड़ा सुरेश शर्मा व राजेश आत्रेय हुआ करते थे। ड़ाक्टर साहब के उस समय के साथ ने जिंदगी के मायने, सोचने के तरीके, मान्यताएँ सभी कुछ बदल दिया। मेरे जैसे कितने ही साक्षरताकर्मी है जिनकी जिंदगी मे बदलाव आया है व वैज्ञानिक समझ पैदा हुई है। यह श्र्देय डाक्टर साहब का ही योगदान की आज हम देश, दुनिया मे कही भी रहे लेकिन समाज बदलाव व समाज मे वैज्ञानिक समझ के पैदा करने का प्रयास निरंतर जारी है। और जारी रहेगा। 
  वैचारिक, मानसिक, दोस्त - गुरु डाक्टर शंकर लाल अलविदा सलाम, जिंदाबाद
*****
जल्‍दी करते-करते भी रात का एक बजे ही गया था। अगली सुबह समालखा के रास्‍ते पर थे। मैंने नोटिस किया कि सड़क किनारे  बस की प्रतीक्षा करतीं कुछ महिलाएं और लड़कियां दुप्‍पटे से अपने सिर सहित, अपने चेहरे को भी ढके हुई थीं, लगभग घूंघट के अंदाज में। उन्‍हें देखकर हरियाणा की खाप पंचायतों के बारे में सुनी -पढ़ी बातें याद आती रहीं। सुकून की बात यह थी कि वे घर से बाहर तो निकल रहीं थीं।

समालखा में भारत ज्ञानविज्ञान समिति द्वारा संचालित जीवनशाला के बच्‍चों और अध्‍यापकों से मिलना था। 1990 के दशक में हरियाणा का पानीपत जिला साक्षरता अभियान के लिए देश भर में मशहूर था। वहां इस अभियान को पानीपत की चौथी लड़ाई का नाम दिया गया था। पानीपत के अभियान ने हरियाणा के अन्‍य जिलों को भी प्रभावित किया था। 1997 के आसपास भारत ज्ञानविज्ञान ने जीवनशाला की नींव डाली। इन शालाओं में वे बच्‍चे पढ़ने आते थे, जो किसी कारण विशेष से सरकारी स्‍कूलों से बाहर आ गए थे, या बाहर रह गए थे। उद्देश्‍य था इन बच्‍चों को एक-दो साल की तैयारी के बाद पुन: सरकारी स्‍कूलों में भेजना। जीवनशालाएं सफल हुईं। लेकिन आंदोलन का रूप नहीं ले पाईं। समालखा विकासखंड में दो जीवनशालाएं अब भी चल रही हैं। हालांकि इनकी स्थिति बहुत अच्‍छी नहीं है। समालखा के पास हथवाला में गांव की चौपाल में 40 बच्‍चे और दो अध्‍यापक जीवनशाला में हमें मिले। उनका उत्‍साह देखते ही बनता था। बच्‍चे और अध्‍यापक दोनों ही हमारी उपस्थिति के बावजूद सहज थे। बच्‍चों से बातचीत हुई, अध्‍यापकों से भी। यहां की जीवनशाला शहीद वीरेन्‍द्र स्‍मारक समिति द्वारा संचालित की जाती है। वीरेन्‍द्र साक्षरता अभियान के सक्रिय कार्यकर्त्‍ता थे। 1992 में एक टैंकर में लगी आग से लोगों को बचाते हुए वे शहीद हो गए थे।

उनकी याद में एक पुस्‍तकालय भी संचालित किया जाता है। हम उस पुस्‍तकालय में भी गए और उसके कुछ सक्रिय पाठकों से भी मिले। मैंने अपने कविता संग्रह ‘वह, जो शेष है’ कि एक प्रति पुस्‍तकालय को भेंट की।
 *

दोपहर बाद हम समालखा में थे केन्‍द्रीय जीवनशाला में। यह अब जीवंत नहीं है यानी अब यहां कोई शाला नहीं चल रही है। यद्यपि बच्‍चे अभी भी यहां रहते हैं, पर वे पढ़ने सरकारी स्‍कूल या कॉलेज में जाते हैं। यहां से पढ़कर बाहर निकले 18 युवक-युवतियां एकत्रित हुए थे। उनमें से हरेक की कहानी अपने आप में एक अनुभव था। एक युवती और एक युवक अपना अनुभव सुनाते-सुनाते भावावेश में रो पड़े। इसे भी वीरेन्‍द्र स्‍मारक समिति संचालित करती है। इसके कार्यकर्त्‍ता अभी भी इस कोशिश में लगे हैं कि इस फिर से शुरू किया जाए। यहां भी एक पुस्‍तकालय संचालित है। अपने संग्रह की एक प्रति मैंने यहां भी भेंट की।
********
आदर्श वरिष्ट माध्यमिक विद्यालय देहरा व बसाड़ा में       "सूरत बदलनी चाहिए "
                         नाटक का थीम धर्मान्धता,अंधविश्वास, साम्प्रदायिकता जातिवाद, सामाजिक आर्थिक असमानता, नारी उत्पीड़िन, बलात्कार, लम्पट पथप्रष्ट युवा, बेरोजगारी व व्यवस्था में मौजूद अकूत भ्र्ष्टाचार आदि विसंगतियों पर केंद्रित रहा।
                   नाटक का जोरदार मंचन SHG से जुड़ी सैकड़ों महिलाओं व पंचायत के द्वारा पूरा प्रबनधन तथा उत्साहवर्धक तरीके से जत्थे का स्वागत करते हुए, स्कूल से रिटायर्ड प्राचार्य अजमेर जी ने नाटक के उद्घाटन सत्र में विचार साझा किये। बतौर मुख्य वक्ता देश के जाने माने जन विज्ञान आंदोलन प्रमुख प्रणेता डॉ रणबीर सिंह दहिया जी ने मौजूदा दौर में देश और समाज के सामने मौजूद समस्याओं का खुलासा करते हुए व उनके समाधान में अनपढ़ता के खात्मे से शुरू हुई पानीपत की  चौथी लड़ाई द्वारा ज्ञान विज्ञान आंदोलन की ऐतिहासिक भूमिका को रेखांकित करते हुए आज पुनः सबको एकजुट होकर ज्ञान विज्ञान आंदोलन को मजबूत करने का जन प्रेरक आह्वान किया।
डा शंकर लाल व मास्टर रणधीर सिंह जागलान (ईसराना) व डॉ नवमीत तथा डा. बी वी अबरोल,करनाल से, राज पाल दहिया की गरिमामय उपस्थिति, सूबे गोपीचंद देशवाल, जयप्रकाश सरपंच राकसेडा, गौरव कुमार संरपंच बसाडा आदि सभी पूरा दिन जत्थों की प्रस्तुतियों में शामिल रहे। कृषि वैज्ञानिक डा राजबीर गर्ग ने बसाड़ा में उद्घाटन सत्र में महिला किसानों  के जीवन पर विचार साझा किए। रागनी गायक कवर सिह व शीशपाल की आवाज में श्री मंगत राम शास्त्री 【जींद】द्वारा लिखित इस सिस्टम की बदमाशी का आज पाटगया तोल भाई और पीवै सै रोज दारू होगया शराबी री मां दो रागनियों ने समा बांध दिया।
*******
पानीपत की चौथी लड़ाई 
सारे मिलकर करैं पढ़ाई
शायद मतलौडा ब्लॉक की वर्कशॉप थी टीचर्स और अक्षर सैनिकों कि primar निरक्षरों की  क्लास में कैसे पढ़ना पढ़ाना है । एक पाठ बरसात कैसे होती है इस पर था । कैसे सूर्य की गर्मी और पानी के वाष्पीकरण से बादल बनते हैं और बरसात होती है। एक अध्यापक महोदय ने कहा यह गलत है, बरसात तो हवन करने से होती है ।
हमारे साथी ने उसे और ज्यादा सहजता के साथ समझाया कि बरसात के पीछे क्या क्या वैज्ञानिक मसले हैं । मास्टरजी तो अड़े रहे। फिर हमारे साथी ने पूछा-मास्टरजी आपका बच्चा कौनसी क्लास में पढता है?
जवाब था-- आठवीं में।
साथी-- यदि उसके एग्जाम में यह सवाल आ जाय कि बरसात कैसे होती है तो आप उसे क्या सलाह देंगे
मास्टरजी-- उसे तो मैं यही कहूंगा कि बरसात बादलों से होती है यही लिख कर आना।
साथी से रहा नहीं गया और कहा- फूफा फेर आध घण्टे तैं    म्हारा सिर क्यूँ खान लागरया सै। 
यूं ही याद आयी पानीपत की चौथी लड़ाई जो 1990 में शुरू की और अब तक जारी है ।
******
 . एक किसान एक एकड़ में कितना गन्ना पैदा करता है ?
2  एक क्विन्टल गन्ने में कितनी चिन्नी बनती है ?
3 . कितना शीरा बनता है ? 
4 . कितनी खोही बनती है ? 
5 . इनसे आगे एक किलो शीरा से एक दारू की बोतल बनती है । 
6 . इसी प्रकार खोही से कापी पेन्सिल और बिजली बनती है । 
क्या कोई किताब है ऐसी जिसमें इसका पूरा हिसाब किया गया हो ? 
1990-92 में पानीपत की चौथी लड़ाई नाम से साक्षरता अभियान में ये सवाल लोगों ने उठाये थे । मैंने दो साल वहां काम किया था \
तब से उस किताब को ढूंढ रहा हूँ ? आपके पास हो तो एक कापी मुझे भी भेजना जी । ----

शुक्रवार, 25 अप्रैल 2025

अंधविश्वास

*धन और इज्जत लूटने का काम करते हैं ओझा-तांत्रिक*

आज इकीसवीं सदी में विज्ञान पृथ्वी से चंद्रमा और मंगल में जा पहुंचा है। लोग आधुनिक कहलाने लगे हैं। आधुनिक युग में भी लोग ओझा-तांत्रिक के जाल में फंसे हुए हैं। गरीब हो या अमीर, अनपढ़ या पढ़ा-लिखा सभी अंधविश्वास के मायाजाल से अछुते नहीं है। ज्योतिष और तांत्रिक लोगों को मूर्ख बनाकर धन और इज्जत लूट रहे हैं और भोलेभाले लोग खुलकर लुटा रहे हैं। इनके पास सोचने-समझने के लिए भी वक्त नहीं है। पूरा समय को तांत्रिक की पूजा सामग्री के इंतजाम में नष्ट कर रहे हैं। भोली-भाली जनता बिना सोचे-समझे धन और इज्जत को इन पाखंडियों के चरणों पर अर्पित कर रही हैं। 

*देश में बढ़ रहे बलात्कारी बाबा*

व्यक्ति अपनी बुद्धि को उन पाखंडी बाबाओं के पास गिरवी रख देता है, इसीलिए पाखंडी की मीठी-मीठी बातों में आकर पाखंड करता है। खुद तो अंधविश्वास में डूबता है और अपने साथ में परिवार वालों को भी इस दलदल में धकेल देता है। यहां तक छोटे-छोटे बच्चों को भी ले डूबाता है। वहीं महिलाओं को घर के अंदर रखने वाले पुरुष अपनी पत्नी और बेटी को बलात्कारी बाबाओं के गुफाओं में भेज देते हैं। देश में आसाराम, रामरहीम, फलाहारी जैसे बलात्कारी बाबाओं की संख्या दिनों-दिन बढ़ती जा रही है। 

*रूढ़ियों को तोड़ने की जरूरत*

ज्यादातर लोगों के घरों में सुबह से लेकर रात तक अंधविश्वास का सिलसिला चलता रहता है। परिवार के समझदार व्यक्ति अगर पाखंड को लेकर टोकता है, तो उसकी खिल्ली उड़ाकर उसे मूर्ख, अधर्मी, कहकर उसकी मजाक उड़ा कर उसे शांत कर देते हैं और वह समझदार व्यक्ति भीड़ में अकेला पड़कर चुप रह जाता है। यहां पर मुझे राहुल सांस्कृत्यायन की बातें याद आती है *'रूढ़ियों को लोग इसलिए मानते हैं, क्योंकि उनके सामने रूढ़ियों को तोड़ने वालों के उदाहरण पर्याप्त मात्रा में नहीं हैं।'* उन्होंने सच ही कहा है।

*तंत्र-मंत्र का ढोंग करने वाले खुद जाते हैं अस्पताल*

कथाकार भी भगवान कथा के नाम पर धर्म का चोला ओढ़कर लोगों को ठगने का काम कर रहा है। अवैज्ञानिक बातों का जोर-शोर से प्रचार कर लोगों को अंधविश्वास में ढकेल रहा है और लाखों, करोड़ों रुपए ठग कर ले जा रहा है। समाज को ऐसे पाखंडी लगतार लूटते आया है और अभी भी लूट रहा है। पाखंडियों को स्वर्ग-नर्क, नक्षत्र, कुण्डलीदोष, पाप-पुण्य, भाग्य, किश्मत जैसी बातों के अलावा कुछ नहीं आता है। ये सब कुछ धूर्त लोगों के बनाए हुए लूटने के हथकंडे हैं, लेकिन इन काल्पनिक बातों पर बहुजन लोग विश्वास करते हुए आ रहे हैं। यही तांत्रिक और ज्योतिष जब बीमार पड़ते हैं तो डॉक्टर के पास अस्पताल में इलाज कराने के लिए जाते हैं। इन पाखंडियों को अगर तंत्र-मंत्र की शक्ति पर विश्वास है तो डॉक्टरी दवाई लेना बंद कर देना चाहिए।

*वैज्ञानिक दृष्टिकोण से बनेगा बेहतर समाज* 

महामारी (कोरोना) के समय पूजा-पाठ, तंत्र-मंत्र, झाड़-फूक कुछ काम नहीं आया। इस पाखंडी के चक्कर में जिस किसी ने आया उसका अंत ही हुआ। ज्यादातर लोग दोगला चरित्र के होते हैं, इधर भी जय, उधर भी जय। जब विज्ञान की जरूरत पड़ती है तो विज्ञान के चरण में जाते हैं, बाकी समय पाखंडी बने फिरता है, विज्ञान के विरोध में काम करता है। जब दो पैरों को अलग-अलग छोर में रखकर खिंचाव होगा तो उस व्यक्ति का फटना तय है और फट रहा है। धीरे-धीरे पाखंडियों का धंधा बंद हो जाएगा, सब पाखंड खत्म हो जाएगा। अंधविश्वास बहुत बड़ी मानसिक बीमारी है और इसका अंत जरूर होगा। उस समय वैज्ञानिक दृष्टिकोण होगा और बेहतर समाज होगा। कोई जाति-धर्म नहीं होगा और सब इंसान होंगे।

*- मनोवैज्ञानिक टिकेश कुमार, अध्यक्ष, एंटी सुपरस्टीशन ऑर्गेनाइजेशन*

*व्हाट्सएप ग्रुप ज्वाइन करने के लिए-*
https://chat.whatsapp.com/KQTZMGVfKFM0gUXPPgqEBh

*फेसबुक पेज-*
https://www.facebook.com/AntiSuperstitionOrganization/

*ट्विटर पर फॉलो करें*
https://twitter.com/asocg2022

*टेलीग्राम ग्रुप ज्वाइन करें-*
https://t.me/asochhattisgarh

Anti Superstition Organization (ASO)
*अंधविश्वास, रूढ़िवाद व तमाम कुरीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद करें और बेहतर समाज बनाने के लिए संघर्ष करें।*